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ज्ञान वाणी हिंदी ब्लॉग एग्रीगेटर
चिट्ठियों को याद करते हुए: जनसत्ता में ‘ज़ुर्रत’
27 जनवरी 2012 को जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ में ज़ुर्रत चिट्ठियों की [read more]
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विदा हो गयीं किताबें बेटियों की तरह: हिन्दुस्तान में ‘कथाकार’
27 जनवरी 2012 को हिन्दुस्तान के नियमित स्तंभ ‘साइबर संसार’ में कथाकार की बेटियाँ इस पृष्ठ तक आने वाले, सर्च इंजिन से यह शब्द तलाशते आए:हिन्दुस्तान ई पेपर Delhi [read more]
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अन्ना को नहीं दिखाई गई 'छन्नो​​'...खुशदीप
​बुधवार को पोस्ट लिखी थी...अन्ना, चमाटा और वीना मलिक...​ ​​ ​मंगलवार को अन्ना ने रालेगण सिद्धि में फिल्म गली गली चोर है देखने के बाद मीडिया से बात करते हुए चमाटे वाला बयान दिया था...मुझे ये जानने की बड़ी उत्सुकता थी कि जब अन्ना गांव क ... [read more]
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अन्ना के दौर में धर्मेंद्र के 'सत्यप्रिय' की याद...खुशदीप​
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मौसमी सेक्युलर: दबंग दुनिया में ‘मधुशाला’
25 जनवरी 2012 को दबंग दुनिया के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग से’ में मधुशाला सेक्युलरों की [read more]
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औरतें खुश रहना क्यों नहीं जानतीं: पीपुल्स समाचार में ‘ज़िंदगीनामा’
25 जनवरी 2012 को पीपुल्स समाचार के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग बोले’ में ज़िंदगीनामा मर्दों का [read more]
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ऐसे में जनता कहां जाए: राष्ट्रीय सहारा में ‘मेरी डायरी’
25 जनवरी 2012 को राष्ट्रीय सहारा के साप्ताहिक परिशिष्ट ‘आधी दुनिया’ में मेरी डायरी के पन्ने इस पृष्ठ तक आने वाले, सर्च इंजिन से यह शब्द तलाशते आए:सहारा पेपर [read more]
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वोट मांगने की विविध शैलियां: आज समाज में ‘लिखो यहां वहां’
25 जनवरी 2012 को आज समाज के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग’ में लिखो यहां वहां शैली के साथ [read more]
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मेरी तहज़ीब मेरी पहचान: जनसता में ‘दरीचा’
25 जनवरी 2012 को जनसता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ में दरीचा पहचान का [read more]
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सिपाही की डायरी से ( अनुवादित अंश )
       मै सोचता हूँ , जब भी मौक़ा मिलता है ,तेरे खयालो में गुम रहना ही अच्छा लगता है | ये आदत पहले नहीं थी ,पता नहीं आजकल क्यों पड़ गयी है | सोचता हूँ ,डोली स्कूल से आ गयी होगी ,उसे अपने प्रोजेक्ट के लिए सामान जुटाने में तुम्हे एक दूकान स ... [read more]
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अन्ना, चमाटा और वीना मलिक...खुशदीप​
 रालेगण सिद्धि में मंगलवार रात को निर्देशक रुमी जाफरी की नई फिल्म गली गली चोर है की अन्ना हज़ारे के लिए खास तौर पर स्क्रीनिंग की गई...भ्रष्टाचार पर बनी इस कामेडी फिल्म को गांव वालों के साथ देखने के बाद अन्ना हज़ारे ने मीडिया से भी बात क ... [read more]
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​दरबार साहिब पर टिप्पणी हर भारतीय का अपमान...खुशदीप
विदेशों में कुछ ​टीवी-रेडियो प्रेजेंटर्स के लिए भारत और यहां के लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करना शायद शगल बन गया है...कुछ महीने पहले न्यूज़ीलैंड में एक प्रेजेंटर ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित में दीक्षित की स्पैलिंग को त ... [read more]
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बेहद कमजोरी आ जाये तो
बहुत सारी बीमारियाँ ऎसी होती हैं कि  वो जब छोडती हैं तो जैसे लगता है कि शरीर में जान ही नहीं बची, और ऊपर से सितम ये कि कुछ खाने-पीने की इच्छा भी नहीं होती. फिर कोई हमदर्दी में  ताकत के लिए दवा -सिरप का नाम लेता है तो उससे बड़ा दुश्मन को ... [read more]
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कुछ काम भी तो नहीं करती !
कुछ जरुरी काम हैं , बहुत जरुरी काम हैं ना जाने कितने समारोह छोड़ दिए थे मैंने यही कह कहकर कि काम है बहनों की शादी हो या भाइयो की सगाई बस एक दिन पहले ही पहुंच पाती हूँ कैसे पहुँचती काम ही जो इतना होता हैं कई बार मन करता हैं , सखिय ... [read more]
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साहित्यकार ऐसे होते हैं तो हम ब्लॉगर ही भले...खुशदीप
बॉलीवुड का एक बात के लिए मैं बहुत सम्मान करता हूं कि यहां एक दूसरे को कभी मज़हब के चश्मे से नहीं देखा जाता...सब एक दूसरे से घी-शक्कर की तरह ऐसे घुले-मिले हैं कि कोई एक दूसरे को अलग कर देखने की सोच भी नहीं सकता...बल्कि जब भी देश की एकता ... [read more]
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कामनाओं की समाप्ति नहीं केवल सहजता से नियंत्रण(संयम) ही संभव है
कुँवरानी निशा कँवर नरुका एक पुरानी कहावत है कि नाग को पिटारी में बंद कर देने से उसका जहर दूर नहीं होसकता! अर्थात जोर जबरदस्ती से अपनी इच्छाओं का दमन करने से इच्छाएं और अधिक विकराल रूप लेलेती है ,जिन्हें हम कुंठाएं भी कहते है| इसलिए जो ... [read more]
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चेतन भगत-रिवोल्यूशन 2020 विद सेक्स...खुशदीप ​
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मूर्ति पूजा क्यों की जाती है ?
एक बार भ्रमण करते धर्मयोद्धा स्वामी विवेकानन्द अलवर राज्य में गये । सम्पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ महाराजा ने स्वामी जी का भव्य स्वागत किया । महाराजा युवक थे एवं पश्चिमी विचारों से कुछ - कुछ प्रभावित भी थे । मूर्ति पूजा में उनकी आस्था नह ... [read more]
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पानी में अपने भी जहाज़ चला करते थे...खुशदीप
कहां गई वो बचपन की अमीरी हमारी, जब पानी में अपने भी जहाज़ चला करते थे ------------------------------------- [read more]
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शादी पर लेना होगा अब आठवां वचन भी...खुशदीप
सरकारें हमेशा बुरा ही काम नहीं करती...कभी-कभार भूले-बिसरे अच्छा काम भी कर लेती हैं...राजधानी दिल्ली की सरकार ने ऐसा ही एक कदम उठाया है...एक ऐसी अनूठी मुहिम शुरू की है, जिसका समाज पर बहुत अच्छा असर पड़ सकता है...खास कर उन युवक-युवतियों प ... [read more]
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राजपूती- चोला
समय के साथ -साथ जमाना बदल जाता है, ''खानपान'' और ''रहन-सहन'' पुराना बदल जाता है, वक़्त की रफ़्तार में शख्स रंग बदल जाता है, मत बदलो ''राजपूती-चोला'', जीने का ढंग बदल जाता है,, [read more]
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जो गुरु बसै बनारसी, सीष समुन्दर तीर
रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनुसार, प्रारम्भ में ही ज्ञान शिक्षा का आश्रम स्थापित करने के लिए गुरु की आवश्यकता पड़ती है। शिक्षक तो आवेदन करते ही लाइन लगा देते हैं, पर गुरु तो फरमाइश करते ही,  नहीं मिल सकते।। प्रस्तुत है कबीर के नजरिये से सम्बंध ... [read more]
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क्षत्रिय- एकता
कब तलक सोये रहोगे,सोने से क्या हासिल हुआ, व्यर्थ अपने वक्त को खोने से क्या हासिल हुआ,, शान और शौकत हमारी जो कमाई ''वीरों'' ने वो जा रही, अब सिर्फ बैठे रहने से क्या हासिल हुआ,, [read more]
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देखी मुसलमानों की हेकड़ी ??????????
भाई हिन्दू कायर कौम यह तो होता ही रहेगा. जब बेगेरेत बने रहोगे तो यह बाबा राम देव तो क्या चीज है यहाँ तो श्री राम देव (भगवान् श्री राम) को ही मुसलमानों ने नापने की कोई कसर नहीं छोड़ी. भारत माता को किसी हिन्दू ने डायन नहीं कहा एक मुसलम ... [read more]
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लीजिए हाजिर है ब्लॉगर.कॉम पर थ्रेडेड कमेन्ट सिस्टम : बिना किसी टोटके के !
शायद आपकी ब्लॉगर ब्लॉग की सेटिंग कुछ ऐसी हो तो आज अपने ब्लॉग पर ब्लॉगर द्वारा उपलब्ध कराये गए विकल्प से अत्यंत खुश हो सकते हैं। हम सब जानते हैं कि बहु-प्रतीक्षित चीजों  के आने से अत्यंत खुशी  हुआ ही करती है।  और यह बहु-प्रतीक्षित खुशी ह ... [read more]
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1952 के चुनाव प्रचार की एक झलक
देश में कोई भी चुनाव हो बिना धन व साधनों के कोई भी उम्मीदवार चुनाव जितना तो दूर ठीक से प्रचार तक नहीं नहीं कर सकता| आजकल तो गांवों में सरपंचों के चुनावों में भी धन व साधनों की आवश्यकता पड़ती है| [read more]
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गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि गढ़ि काढ़ै खोट
शिक्षा-प्रणाली में विद्यार्थी को केन्द्र में रखने की आवश्यकता को महत्वपूर्ण ढंग से रेखांकित करने के बावजूद रवीन्द्रनाथ ने गुरु की भूमिका और महत्ता पर विशेष बल दिया है। प्रस्तुत है कबीर के नजरिये से सम्बंधित तीसरी कड़ी..... [read more]
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गुरु की आज्ञा आवै, गुरु की आज्ञा जाय ।
दरअसल, गुरु का अर्थ ही होता है-बडा, यानी जो हर मायने में बडा है। और इसे और ज्यादा गहरे अर्थो में कहें, तो गुरु का अर्थ है, जो हमें गुर या कोई गुण सिखाते हैं।  प्रस्तुत है दूसरी कड़ी..... [read more]
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दीया मिर्जा को किया गया गिरफ्तार
बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार की सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि बाद में उन्हें जुर्माना लगाने के बाद रिहा कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार दीया थाई एयरवेज की फ्लाइट से बैं ... [read more]
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विधा एवं अविधा
"कुँवरानी निशा कँवर" विधा एवं अविधा में भेद बहुत ही हल्का होता है ,बल्कि वास्तव में तो लोग अविधा की गठरी को ही, विधा समझ कर उसे उपने सिर पर लादे फिरते है |भारतीय मनीषियों ,ऋषि ,मुनियों ने हमेशा ही विधा के धोखे में अविधा से सचेत रहने के ... [read more]
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